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मानव कल्याण एवं विश्व शांति स्थापना के पावन संदेशों से श्री पुरी धाम से आरंभ हुई तीन दिवसीय अग्र-ंउचयभागवत कथा

मानव कल्याण एवं विश्व शांति स्थापना के पावन संदेशों से श्री पुरी धाम से आरंभ हुई तीन दिवसीय अग्र-ंउचयभागवत कथा

‘‘ओडिशा जन-ंउचयमन में आपसी सौहार्द,मैत्री,एकता और शांति के लिए अग्र-ंउचयभागवत-ंउचयकथा का श्रवण होना चाहिए।’’-ंउचयप्रोफेसर गणेशली लाल,राज्यपाल,ओडिशा ‘‘ओडिशा के श्रीजगन्नाथ धाम से आरंभ हो रही है पहली अग्र-ंउचयभागवत कथा जो चारों धामों में आयोजित होगी।.’’ -ंउचयश्री गोपाल शरण गर्ग-ंउचयराष्ट्रीय अध्यक्ष,अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन ओडिशा समेत पूरे भारत से कुल लगभग 250 अग्र बंधुओं ने पहले दिवस की कथा का श्रवण किया।

अशोक पाण्डेय

आज कथा का दूसरा दिवस है-ंउचयडा किशनलाल भरतिया;आयोजक भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी द्वारा मानव कल्याण एवं विश्व शांति स्थापना के लिए गीता के उपदेशों के ही श्रवण का संदेश है जो आज पुरी धाम में अग्र-ंउचयभागवत कथा द्वारा पूरा हो रहा है-ंउचयश्री महेन्द्र कुमार गुप्ता,प्रांतीय अध्यक्ष मन की चंचलता को दूर कर सनातनी परिवार में शांति की स्थापना का पावन संदेश घर-ंउचयघर जाता है अग्र-ंउचयभागवत कथा श्रवण से-ंउचयविश्वविख्यात कथा वाचक पण्डित विजय शंकर मेहता 15जून को पुरी के पुरुषोत्तम वाटिका में सायंकाल 4. 00 बजे से ओडिशा के माननीय राज्यपाल प्रो गणेशी लाल ,श्री गोपाल शरण गर्ग-ंउचयराष्ट्रीय अध्यक्ष,अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन,श्री अशोक अग्रवाल,राष्ट्रीय अध्यक्ष अन्तर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन,आयोजन की जिम्मेदारी वखूबी वहन कर रहे डा किशनलाल भरतिया, श्री महेन्द्र कुमार गुप्ता,उत्कल प्रांतीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के साथ-ंउचयसाथ मारवाड़ी समुदाय के अलग-ंउचयअलग संगठनों से जुड़े ओडिशा के अलग-ंउचयअलग शहरों समेत पूरे भारत के कुल लगभग 250 अग्र-ंउचयबंधुओं ने पहले दिवस पर विश्वविख्यात कथा वाचक पण्डित विजय शंकर मेहता की कथा सुनी जो पूरे सनातनी विधि-ंउचयविधानों के तहत आरंभ हुई। अपने संबोधन में बतौर समारोह के मुख्य अतिथि ओडिशा के मानीय राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल जी ने सबसे पहले ओडिशा प्रदेश की ओर से पूरे भारत से आये हुए अग्रबंधुओं का स्वागत किया और यह बताया कि मानवता के कल्याणा के साथ-ंउचयसाथ ओडिशा जन-ंउचयमन में आपसी सौहार्द,मैत्री,एकता और शांति के लिए अग्र-ंउचयभागवत-ंउचयकथा श्रवण जरुरी है।वहीं श्री गोपाल शरण गर्ग-ंउचयराष्ट्रीय अध्यक्ष,अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन ने बताया कि आज पूरा विश्व अशांति के मार्ग से गुजर रहा है। मानव का कल्याण सही तरीके से नही हो पा रहा है ऐसे में उनके भारत के चार धामों में इसके आयोजन का एकमात्र लक्ष्य विश्व मानव कल्याण और शांति है जिसका शुभारंभ पुरी धाम से आज हुआ। उनके अनुसार अग्र-ंउचयभागवत वहीं है जो गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को महाभारत युद्ध से पूर्व सुनाई थी। व्यासपीठ पर विराजमान होकर पण्डित विजय शंकर मेहता ने सबसे पहले अपने गुरुओं एवं इष्टदेवों की वंदना के उपरांत मानव चित्त और मन की शांति के लिए श्रीहरिनाम का संकीर्तन किया। संतो ंके नामों का स्मरण किया,सनातन धर्म का स्मरण किया। उन्होंने यह भी बताया कि आज मानव-ंउचयमन भौतिकता के चकाचैंध से प्रभावित है। विश्व में चारों तरफ अशांति है। मानव का कल्याण मात्र अग्र-ंउचयभागवत कथा श्रवण से ही संभव है। गौरतलब है कि स्वर्गीय पण्डित दीनदयाल उपाध्याय,भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और समस्त सनातनी धर्मगुरुओं का यही मानना है कि जो उपदेश भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में अर्जुन को दिया है वहीं उपदेश प्रत्येक मानव के कल्याण के लिए,विश्व मानवता की रक्षा के लिए,विश्व में अमन-ंउचयचैन बहाली के लिए ,मन की चंचलता को दूर करने के लिए और भगवत भक्ति में रमाने के लिए आवश्यक है।उनके अनुसार मानव जीवन एक कर्मक्षेत्र है जिसमें आत्मविश्वास,संयम,धैर्य,सहनशीलता,दया,क्षमा,त्याग,परोपक ार और आत्म मनोबल को सदैव बनाये रखने के लिए नित्य अग्र-ंउचयभागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। कथा व्यासजी के अनुसार यह तो प्रत्येक घर,प्रत्येक परिवार और प्रत्येक समाज के श्रवण के लिए ही है जिससे कि मन की चंचलता दूर हो सके। सभी के विचार सकारात्मक हो सकें और सभी एक-ंउचयदूसरे के प्रति विश्वासी बनकर समाज,राष्ट्र और विश्व मानवता की निःस्वार्थभाव सेवा कर सकें।आज कथा का दूसरा दिवस रहा जिसमें अग्र-ंउचयभागवत कथा का श्रवण बड़े ही शांत मन से उपस्थित माताएं,बहनें एवं अग्र-ंउचयबंधुओं ने सुनी।


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