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अक्टूबर तक रह सकता है टिड्डियों का आतंक

अक्टूबर तक रह सकता है टिड्डियों का आतंक


 अक्टूबर तक रह सकता है टिड्डियों का आतंक 

 

  उप्र. व राजस्थान सहित देश के सात राज्यों में किसानों की परेशानी बढ़ा चुकी टिड्डियों का प्रकोप अक्टूबर तक रह सकता है। इसे लेकर टिड्डी चेतावनी संगठन ने किसानों को अलर्ट किया है। इनके इतने लंबे समय तक फल फूलने का कारण बन रहा है मौसम जो इस समय टिड्डी प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल है। आपको बता दें कि गत वर्ष प्रदेश के बारह प्रभावित जिलों में टिड्डियों पर लगभग पूरा नियंत्रण हो गया था लेकिन इस बार एेसा नहीं हो पाया। इस बार मार्च में पाकिस्तान में बारिश के बाद शेष बची टिड्डियों ने अंडे दे दिए। इसके बाद अप्रेल में टिड्डियां तेज हवा के साथ बॉर्डर पार कर भारत आ गईं और तो और इन दिनों पश्चिमी जिलों में आंधियों.तेज हवा का दौर जारी है, जिससे ट्डिडी बड़े ही आराम से यहां आ रही हैं। आपको बता दें कि तेज हवा के कारण उन्हें उडऩे में आसानी हो रही हैं और वह १०० किलोमीटर की जगह २०० से २५० किलोमीटर तक की दूरी तय कर रही हैं। और तो और वर्तमान में ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ इलाकों में इनका प्रजनन हुआ है। ऐसे में वहीं से टिड्डियां प्रदेश में आ रही हैं। अब यहां भी इनके द्वारा प्रजनन के चलते अक्टूबर तक हालात सामान्य नहीं होने का अनुमान है। हालांकि इस बार टिड्डियों का दल प्रदेश में जल्दी आया है।

कैसे पनपता है टिड्डी दल ÷  टिड्डियों के भारी संख्या में पनपने का मुख्य कारण वैश्विक तापवृद्धि के चलते मौसम में आ रहा बदलाव है। जलवायु परिवर्तन के चलते धरती के कई इलाकों में चक्रवात पैदा हो रहे हैं जिसके चलते बेमौसम बारिश हो रही है। मई 2018 में मेकुनु चक्रवात और इसके बाद अक्टूबर 2018 में लुबन चक्रवात के कारण अरब प्रायद्वीप में भारी बारिश हुई और रेगिस्तान में तालाब बन गएए जो टिड्डी के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल होता है। इसके बाद जनवरी 2019 में लाल सागर के तटीय क्षेत्र में बेमौसम भारी बारिश हो गई। इस क्षेत्र में बारिश की अवधि बढ़कर 9 महीने की हो गई, जिससे ये टिड्डी दल कई गुणा बढ़ गए। अब एक बार फिर देश में मानसून का समय है एेसे में इन टिड्डियों को पनपने के लिए अनुकूल मिलेगा। आपको बता दें कि टिड्डी बहुत तेजी से विकसित होती हैं। इनके एक औसत झुंड में 80 से 100 लाख टिड्डी होती है, पहले प्रजनन में टिड्डी 20 गुणा बढ़ जाती हैं, दूसरे प्रजनन में 400 गुणा और तीसरे प्रजनन में 16 हजार गुणा बढ़ जाती हैं। इसका मतलब है कि अगर प्रजनन की अवधि बढ़ जाए, तो उनकी संख्या में बेतहाशा इजाफा हो जाएगा और लंबे समय से यहां टिकी रहेंगी। विशेषज्ञों ने बताया कि एक मादा टिड्डी तीन बार तक अंडे दे सकती है और एक बार में 95 से 158 अंडे तक दे सकती हैं। टिड्डियों के एक वर्ग मीटर में एक हजार अंडे हो सकते हैं। इनका जीवनकाल तीन से पांच महीनों का होता है। प्रदेश में ढाई लाख हेक्टेयर भूमि प्रभावित आपको यह भी बता दें कि पाकिस्तान से आए 42 टिड्डी दलों ने प्रदेश के 29 जिलों में करीबन ढाई लाख हैक्टेयर भूमि को प्रभावित किया है। साथ ही अन्य राज्यों में भी किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य.कृषि संगठन ने बीते साल के मुकाबले इस बार टिड्डियों का हमला दो से तीन गुना तक होने की जताई गई है। इससे किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ गई है।

 

 

 

 

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