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कोरोना के बाद तीसरे विश्व युद्ध के प्रबल संकेत

कोरोना के बाद तीसरे विश्व युद्ध के प्रबल संकेत


 नई दिल्ली ।खबर है कि एक  तरफ  दुनिया जहाँ  कोरोना में उलझी है वहीं चीन ने परमाणु परीक्षण किया है. चीन के परमाणु संस्थानों ने जमीन के नीचे कम तीव्रता वाले Nuclear Test किए हैं. चीन के परमाणु परीक्षण की खबर अमेरिकी एजेन्सियों ने दी है.


गत दिनों एक और खबर आई जो यह बताती है कि चीन युद्ध की तैयारियों में लगा हुआ है. चीन ने पिछले एक महीने में अपने ऑयल रिजर्व में भारी इजाफा किया है.  दरअसल पिछले दिनों कच्चा तेल सस्ता हुआ है. जिसकी वजह से चीन तेल का विशाल भंडार बनाने में लग गया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक मार्च में चीन का क्रूड इंपोर्ट करीब 12 फीसदी बढ़कर 43.91 मिलियन टन पहुंच गया है. क्रूड ऑयल की कीमत पिछले एक  साल में 50 फीसदी से ज्यादा नीचे आ गई है.


पिछले करीब एक सप्ताह से समुंदर में चीन का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है. वह छोटे देशों के उत्पीड़न पर उतर आया है. जनवरी से फिलीपीन के कब्जे वाले पगासा द्वीप के पास कम से कम 130 चीनी जहाजों को देखा गया है. 


जहां अमेरिका चीन से नाराज है वहीं ब्रिटेन भी चीन को अपनी बर्बादी का जिम्मेदार मानता है. कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि होने के बाद self isolation में रह रहे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सभी ब्रिटिश परिवारों को पत्र लिखा. जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि परिस्थितियां ठीक होने से पहले खराब होंगी. 


दुनिया की महाशक्तियों में गिने जाने वाले यूरोप और अमेरिका अपनी हनक खत्म होते देखकर बेचैन हैं .  अमेरिका औऱ यूरोप अभी तक विश्व की महाशक्तियों और सबसे ताकतवर देशों में गिने जाते थे. जो जब चाहे दुनिया के किसी भी देश को आँखें दिखाकर प्रतिबन्ध लगा देते थे.
लेकिन आज वे सभी कोरोना की वजह से घुटने टेकने की कगार पर पहुंच चुके हैं. फ़्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन और यूरोप व पश्चिम के तमाम देश जो दुनिया पर आर्थिक नियंत्रण रखते थे, कोरोना वायरस की चपेट में आकर तबाह होते जा रहे हैं. 


वो वर्चस्व जो पहले सिर्फ यूरोपियन देशों और अमेरिका के हाथ में रहता था, वह चीन के हाथों में जाता हुआ दिख रहा है. जो देश सदियों से विश्व की व्यवस्था और अर्थ नीति के संचालक थे वे आज नाक रगड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं. ऐसे में अमेरिका और यूरोप कोरोना संकट खत्म होने के बाद अपनी स्थिति वापस पाने के लिए कभी भी चीन पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकते हैं. जिसकी परिणति युद्ध में ही हो सकती है.  


आने वाले विश्वयुद्ध के खतरे को भांपकर अमेरिका की जनता बेचैन हो रही है. उसकी बेचैनी इस बात से भी झलक रही है कि  महामारी के बीच अमेरिका में पिछले महीने रिकार्ड हथियार की खरीद हुई है.

  • यूनाइटेड नेशन और वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के बाद चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है और चीन की महत्वाकांक्षी सरकार इस पायदान पर नम्बर एक होना चाहती है. ये चीन का पुराना सपना है. 
  • कोरोना वायरस चीन में नवम्बर के आखिरी दिनों में सामने आया. लेकिन चीन ने महीनों तक इसकी जानकारी पूरी दुनिया से छिपा कर रखी. 
  • कोरोना से मची अफरातफरी का फायदा उठाकर चीन पूरी दुनिया के शेयर बाजार पर कब्जा कर रहा है. 
  • कोरोना वायरस के प्रसार के लिए चीन ने कई कोशिशें की. चीन के नागरिकों ने कोरोना वायरस लेकर यूरोप और अमेरिका के कई देशों में जान बूझककर यात्रा की. 
  • कोरोना वायरस के बहाने चीन अरबों के मेडिकल इक्विपमेन्ट और टेस्टिंग किट बेच रहा है. जिसमें से ज्यादातर बेहद बुरी क्वालिटी के हैं. 
  • कोरोना वायरस जब शुरुआती दौर में था तब सभी देशों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हवाई यातायात बंद किये जाने संबंधी कदम उठाने की कोशिश की गई थी. लेकिन चीन ने इसमें अड़ंगा डाल दिया. 
  • यूनाइटेड नेशंस की सुरक्षा परिषद् ने जब कोरोना की पारदर्शिता को लेकर मीटिंग बुलाने का निर्णय लिया तब चीन ने अपने वीटो पावर का अधिकार करके इस मीटिंग को ही कैंसिल करवा दिया. 

यह सभी संकेत इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि कोरोना वायरस के बहाने चीन अपनी विस्तारवादी नीति को बल दे रहा है. अमेरिका और यूरोप भी चीन की इस कुटिल साजिश को भांप चुके हैं. लेकिन वे कोरोना वायरस से जूझने में व्यस्त हैं. लेकिन जैसे ही कोरोना का प्रकोप कम होगा पूरी दुनिया चीन पर टूट पड़ेगी. ऐसे में इस संघर्ष को विश्व युद्ध में तब्दील होने से कोई रोक नहीं सकता. 

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