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"ट्रु लाईज़"

"ट्रु लाईज़"


"ट्रु लाईज़"

हम कहते हैं कि सच - झूठ से ज्यादा ताकतवर होता है।

वास्तव में, इसमें तो कोई शक ही नहीं है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि झूठ में सच से ज्यादा ताकत होती है?

यदि आपने मेरा पिछला लेख पढ़ा है, रिश्तों का पुन: परिचय: 

एक नन्ही सी बच्ची के माध्यम से सब एक दूसरे से जुड़ गए और ऐसा दिखावा करने लगे जैसे हम एक दूसरे को जानते ही नहीं हैं।

लेकिन उस झूठ में उद्देश्य या भाव बिना शर्त खुशी थी।

लोगों को समझाने के लिए, हमने दो शब्दावली पेश की हैं। सच और झूठ। हम कहते हैं कि वे सिक्के के दो पहलू हैं।

सच कहा!

याद रखें, हर सच झूठ बन सकता है और हर झूठ कुछ ही समय में सच हो सकता है।

हमारा नज़रिया ही सच को झूठ या झूठ को सच बनाता है, वरना वो वही हैं, जो मायने रखता है उसका झूठ से सच या सच से झूठ में संक्रमण होना।

प्रत्येक संक्रमण का अपना मापदंड होता है।

यह विशेष से सामान्यीकरण, सामान्यीकरण से विशेष की ओर बढ़ता है।

सच के झूठ या झूठ के सच के पीछे का मकसद उसके संक्रमण की स्थिति को निर्धारित करता है।

उद्देश्य जितना शक्तिशाली होगा, उसका परिणाम उतना ही अच्छा होगा।

तो आपके सच्चे झूठ क्या है?

तृप्ति शुक्ला-मुंबई

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