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हिन्दी भाषा को लेकर एक वातावरण बनाना होगा- आशीष कंधवे

हिन्दी भाषा को लेकर एक वातावरण बनाना होगा- आशीष कंधवे


हिन्दी भाषा को लेकर एक वातावरण बनाना होगा- आशीष कंधवे

नई पीढ़ी के चहुंमुखी विकास को समर्पित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका फाउंडेशन द्वारा गत दिनों हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर "हिन्दी भाषा नई पीढ़ी" विषयक ऑनलाइन परिचर्चा संपन्न हुई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना वक्तव्य देते हुए गगनांचल पत्रिका के संपादक आशीष कंधवे ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बीतने के बाद भी हिंदी को सरकारी स्तर पर वह सम्मान नहीं मिल पाया जो मिलना चाहिए था। उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए सिर्फ विद्यालयों के माध्यम से भाषा को नहीं बचा सकते बल्कि हमें हिन्दी भाषा को लेकर एक वातावरण बनाना होगा।

इसी तरह कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में अपनी बात रखते हुए न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के हिंदी विभाग प्रमुख अमरीश सिन्हा ने कहा कि नई पीढ़ी का हिंदी भाषा के प्रति अनुराग कम है मैं यह नहीं मानता, बल्कि हिंदी को नई पीढ़ी आगे ले जा रही है ऐसा मैं मानता हूं, आज नई पीढ़ी को सिर्फ यह बताना है कि संवेदनाएं दिल से आती हैं, हृदय से आती हैं,और मातृभाषा ही उस अभिव्यक्ति का एक बेहतरीन माध्यम है, उन्होंने कहा कि हिंदी में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

श्री सिन्हा ने आगे कहा कि नई पीढ़ी के संपादक शिवेन्द्र जी ने जैसे कहा कि यह पत्रिका ही नहीं एक आंदोलन है, निश्चित रूप से यह इनका बहुत अच्छा प्रयास है इस आंदोलन को मेरी बहुत सारी शुभकामनाएं

कार्यक्रम में वक्ता के रूप में अपनी बात रखते हुए देश की प्रतिष्ठित पत्रिका कादंबिनी के पूर्व मुख्य कापी संपादक संत समीर ने कहा कि हिंदी दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन गई है सच पूछिए तो यह भाषा अपनी ताकत के बल पर फैली है, हालांकि आज की नई पीढ़ी हिंदी से विमुख होती जा रही है

क्योंकि हिंदी में अंग्रेजी की छौंक लग रही है सोचने की बात तो यह है कि दूसरे तमाम देश के लोग हिंदी सीखना चाहते हैं, लेकिन यह जिस देश की भाषा है, वहीं की नई पीढ़ी धीरे-धीरे हिंदी से कट रही है।

कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए एमएमपी शाह विमेंस कॉलेज मुंबई की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ उषा मिश्रा ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हिन्दी भाषा को लेकर तमाम बड़ी पहल फाइलों में है, उन्होंने कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए जिस चीज की सबसे अधिक जरूरत है वह है भाव की, अगर भाव आएगा तो परिवर्तन होगा और इस परिवर्तन में हमारा दायित्व, हम सभी का दायित्व बहुत ही महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वैश्विक हिंदी सम्मेलन के अध्यक्ष डॉक्टर मोतीलाल गुप्ता "आदित्य" ने कहा कि मैं अक्सर ही बहुत सारी संगोष्ठी से जुड़ता रहता हूं लेकिन यह संगोष्ठी जिस तरह से एक ऊंचे स्तर की संगोष्ठी साबित हुई है वह मेरे लिए प्रसन्नता का विषय है। 'नई पीढ़ी हिंदी भाषा' पर संगोष्ठी रखने के लिए मैं नई पीढ़ी के संपादक शिवेंद्र जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं उन्होंने आगे कहा कि हिंदी से युवा वर्ग को काटने का काम बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से हुआ है। आज भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए एकजुट होकर काम करने की जरूरत है इसके लिए समाज शासन दोनों को संयुक्त स्तर पर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि भाषा को लेकर हमें नई पीढ़ी के समक्ष संकट समस्या की चर्चा नहीं करनी बल्कि समाधान की चर्चा करनी है।

इस कार्यक्रम का सफल संचालन "नई पीढ़ी फाउंडेशन" शिक्षक शाखा पूर्वांचल प्रभाप्रभाग के अध्यक्ष डॉ राजीव वर्मा द्वारा किया गया

कार्यक्रम के अंत में नई पीढ़ी के तमाम लोगों द्वारा वक्ताओं से कई तरह के प्रश्न भी पूछे गए जिनका वक्ताओं द्वारा समुचित समाधान दिया गया।

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