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"वाजा इंडिया" बिहार की  महिला इकाई की प्रथम बैठक 

"वाजा इंडिया" बिहार की  महिला इकाई की प्रथम बैठक 


"वाजा इंडिया" बिहार की  महिला इकाई की प्रथम बैठक 

लेखकों और पत्रकारों के साझा मंच राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (वाजा इंडिया) की बिहार प्रदेश की महिला इकाई की प्रथम बैठक बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में 8 सितंबर को संपन्न हुई।

प्रोफेसर भूपेंद्र कलसी की अध्यक्षता में 25 सदस्यीय इस बैठक में तीनों उपाध्यक्ष विभा रानी श्रीवास्तव, पूनम आनंद, माधुरी भट्ट महासचिव शालिनी पांडे ,अर्चना त्रिपाठी ,लता पराशर प्रवक्ता सागरिका राय ,पल्लवी विश्वास ,पुष्पा जमुआर ने भागीदारी की। इस अवसर पर प्रदेश की महिला इकाई की अध्यक्षा प्रो भूपेंद्र कलसी ने इस इकाई के संगठन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। साथ ही सदस्यों द्वारा राज्य के साहित्यकारों और पत्रकारों की समस्याओं की पहचान कर ,समस्याओं के निदान के लिए सही समाधान ढूंढने के लिए विमर्श किया गया। साथ ही संगठन के द्वारा विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। समाज में हो रही असंवेदनशील समस्याओं पर गहराई से विमर्श हुआ कि किस तरह से इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है। अनेक पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया कि किस तरह से आए दिन युवाओं में बढ़ती जा रही अवसाद की स्थिति को रोका जाए ।

आए दिन युवा वर्ग आत्महत्या की ओर आखिर क्यों अग्रसर हो रहा है, इसकी जड़ों को हम किस तरह से इसकी तह तक जाकर उन समस्याओं पर किस तरह से हम सब मिलकर काम कर सकते हैं।

इसके लिए संगठन की सभी महिलाओं को एकजुट होकर काम करना होगा। समय- समय पर युवाओं के बीच जाकर उन्हें सही तालीम देकर ,अवसाद की स्थिति से बाहर निकालना होगा। इसके साथ ही अभिभावकों को जागरूक करना होगा कि वह बच्चों को कभी भी आवश्यकता से अधिक दबाव में ना रखें और ना ही कभी भी किसी बच्चे से अपने बच्चे की तुलना करें। भले ही बच्चे अपने घर के ही हों। हर बच्चे की अपनी- अपनी योग्यता होती है ,क्षमता होती है ,उसे अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करने दें।उसके ऊपर कभी भी दूसरों से तुलना कर अत्यधिक महत्वकांक्षी बनने की कोशिश ना करें ।यदि हम बच्चों को बचपन से ही स्वयं से ही तुलना करना सिखाएंगे तो बच्चे कभी भी अवसाद का शिकार नहीं होंगे बल्कि वे अपने हिसाब से अपने से ही बेहतर कार्य करने की कोशिश करेंगे ।उनके अंदर दूसरों के साथ स्पर्धा कर ईर्ष्या का भाव पैदा नहीं होगा और वे एक -दूसरे के साथ मिलजुल कर रहना अधिक पसंद करेंगे ना कि एक- दूसरे से ईर्ष्या जैसा जानलेवा  भाव पा लेंगे और असफल होने पर  आत्महत्या जैसे जघन्य अपराध की ओर अग्रसर होने से स्वयं को बचा पाएँगे।

हमारी बेसिक शिक्षा इस तरह की होनी चाहिए कि बच्चे स्वावलंबी बन सकें। उन्हें नौकरी के लिए दर-दर न भटकना पड़े ।इस विषय पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। सभा की अध्यक्षता प्रोफेसर भूपेंद्र कलसी द्वारा की गई और धन्यवाद ज्ञापन पूनम आनंद ने किया ।कुल मिलाकर बैठक सार्थक रही और आने वाले समय के लिए सभी महिलाएं अपने अपने दायित्वों को निभाने के लिए तत्पर दिखाई दीं।

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