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हाथरस प्रकरण के बहाने ' पूंजी निवेश-विकास रथ रोको' अभियान

हाथरस प्रकरण के बहाने ' पूंजी निवेश-विकास रथ रोको' अभियान


हाथरस प्रकरण के बहाने ' पूंजी निवेश-विकास रथ रोको' अभियान

 

लेखक - आर. विक्रम सिंह, 

          

    उत्तर प्रदेश में आया हुआ यह उबाल (हाथरस प्रकरण) अनायास या अचानक बन गया नैरेटिव या कथ्य नहीं है.  इसके पीछे एक सोंची समझी हुई रणनीति है, शातिर दिमाग हैं. हमने देखा है कि गत दिनों यूपी 'ease of doing business' के पैमाने पर बहुत ऊपर की छलांग लगा कर देश का दूसरे नम्बर का राज्य बन गया है. शांति-व्यवस्था में भी प्रशंसा मिल रही है. अपराधी प्रदेश से फरार हो रहे हैं. इसका सबका परिणाम यह हो रहा है कि औद्योगिक पूंजी निवेश के लिए, चीन से शिफ्ट होने वाले उद्योगों के लिए उत्तर प्रदेश एक आकर्षक विकल्प बनने की दिशा में तेजी से आगे आ रहा है. कुछ उद्योगों ने सर्वेक्षण प्रारंभ भी कर दिया है.

            इस उपलब्धि के अन्तर्राष्ट्रीय राडार पर आने से पूंजी का मूवमेन्ट यूपी की ओर होना अवश्यंभावी है. अब चीन की सरकार निश्चय ही इसे रोकना चाहेगी, चाहे उसे कुछ भी करना पड़े. जब उद्योगपति उद्योग लगाने चलता है तो शांति-व्यवस्था, अपराध की स्थितियां, बहुत से आवश्यक पैरामीटर्स में से एक महत्वपूर्ण बिंदु होती है. यदि शांति-व्यवस्था या Law n Order पर संदेह हुआ तो आती हुई पूंजी, लगते हुए उद्योग रुक जाते हैं. अगर पूंजी उद्योग का प्रवाह रोकना है तो प्रदेश की शांति-व्यवस्था को खराब व अनियंत्रित, माहौल को निवेश के प्रतिकूल दिखाना अनिवार्य होगा. जाहिर है कि यह तब होगा जब ऐसी घटनाएं होंगी, जातीय-साम्प्रदायिक दंगे होंगे. फिर  समाचार, मीडिया, सोशलमीडिया का सक्रिय सहयोग लेकर उसका जबरदस्त अन्तर्राष्ट्रीय नैरेटिव सेट करके प्रोपेगैण्डा बनाया जाएगा. और प्रदेश को सीरिया, अजरबैजान बताया जाएगा.

               इसके लिए चीननिश्चय ही लिबरल लेफ्ट, पाक ओरिएंटेड समूहों एवं उस राजनैतिक दल से सक्रिय सहयोग लेगा ही जिसके साथ उसने समझौता,' एम ओ यू' हस्ताक्षर कर रखा है. इसीलिए हम देख  व समझ पा रहे है कि अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था के मोर्चे पर नम्बर एक पर चलने वाली सरकार अचानक इन काले बादलों से कैसे घिर गयी है. अब जब यहां मुकाबला चीन की सरकार व चीनी एजेण्टों के सीधे हितों से है तो मुश्किलें आयेंगी ही. यदि विदेशी पूंजी, उद्योगों का आगमन प्रदेश के युवकों के रोजगार के ढ़ाचे को ही बदलने में, उन्हें मुम्बई-कलकत्ते के बजाए प्रदेश में ही समायोजित करने  की ओर चल पड़ा तो योगीजी का बढ़ता हुआ कद कुछ राजनैतिक महात्वाकांक्षियों के लिए सरदर्द भी बन सकता है.

   ...   प्रकारांत से इन तत्वों का मुख्य उद्देश्य मुझे पूंजी प्रवाह को रोकने के लिए प्रदेश का माहौल खराब करने का अधिक लग रहा है. ऐसी स्थिति में निकट भविष्य में भी अत्यंत सजग बने रहने, प्रदेश में विकास का वातावरण बनाए रखने व प्रदेश के नागरिकों को इस खतरे के प्रति सचेत रहकर धैर्य से इसका सामना करने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प नहीं है।

( लेखक पूर्व सैन्याधिकारी व भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रह चुके है)

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