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चोरी करना ईमानदारी के साथ।

चोरी करना ईमानदारी के साथ।


जी हां आपने सही सुना है। यह मंदिर के बाहर हुई घटना है।

हम अक्सर चुटकुला सुनते आए हैं कि आपको अपनी पसंद के जूते चाहिए तो मंदिर जाएं।

वहा हम अक्सर देखते है कि बहुत सारे याचक मंदिर के बाहर बैठे होते है।

जिसमें बड़े, बुज़ुर्ग और बच्चे होते हैं।

बात यू हुई की में मंदिर से बाहर आकर अपने जूते पहन रही हूं। 

उसी क्षण, एक छोटी लड़की है जो बैठी है और वह मुझे सूचित कर रही है कि इस लड़के को देखो वह जूते चुरा रहा है।

मैंने  देखा कि उसने वास्तव में जूते एक तरफ रख दिए हैं।

लेकिन  लड़के ने तुरंत जवाब दिया कि नहीं मैं चोरी नहीं कर रहा हूं।

लेकिन फिर छोटी लड़की ने जिसने मुझे इस बारे में बताया, उसने मुझे यह भी बताया  कि उसके पास पहनने के लिए कोई जूते नहीं हैं, इसलिए वह चोरी कर रहा है।

मुझे समझ में नहीं आया कि में क्या प्रतिक्रिया दू।

हमें लड़की कि समझदारी की सराहना करनी चाहिए।

हम अक्सर गलतफहमी रखते हैं और उन लोगों के बारे में गलत सोचते हैं जो आमतौर पर चोरी करते हैं।

लेकिन इस छोटी लड़की ने मुझे बताया कि वह जूते चोरी कर रहा है क्योंकि उसके पास जूते नहीं है।

हम उनकी मजबूरियां भूल जाते है और उन्हे चोर कहेते है।

यह घटना याद रखने लायक है। चोर केहेना बोहोत आसान है लेकिन किसी कि मजबूरी को 

समज़ना उतना ही मुश्किल है।   

मैं इस छोटी सी बच्ची कि हमेशा आभारी रहूंगी। जिसने मुझे ईमानदारी और सादगी के साथ इस घटना को समझाया।

आप इस बारे में क्या सोचते हैं?

 

तृप्ति शुक्ला, मुंबई। 

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